लेखक: विक्रम चौहान, संस्थापक — 3i Planet (Udaipur Web Designer®), उदयपुर
आजकल हमारा ज़्यादातर समय मोबाइल की स्क्रीन पर ही निकल जाता है। सुबह आँख खुलते ही फ़ोन, और रात को सोने से पहले भी फ़ोन। काम हो, पढ़ाई हो या मनोरंजन — सब कुछ इसी छोटी-सी स्क्रीन में सिमट गया है। ऐसे में दीपावली एक अच्छा मौका है, जब हम कुछ दिन फ़ोन को थोड़ा साइड में रखें और अपनों के साथ वक़्त बिताएँ।
याद कीजिए, बचपन की दीपावली कैसी होती थी। हफ़्तों पहले से घर की पुताई, माँ के हाथ के बने मांडने, दादी की रसोई से आती मठरी और गुंजिया की खुशबू, और शाम को पूरा मोहल्ला एक साथ दीये जलाता था। रिश्तेदारों के घर जाकर "राम-राम" करना ही असली बधाई थी।
आज वही बधाई एक फॉरवर्ड किया हुआ मैसेज बन गई है। लक्ष्मी पूजन के समय आधा ध्यान आरती पर और आधा कैमरे के एंगल पर रहता है। परिवार एक ही कमरे में बैठा है, पर हर कोई अपनी स्क्रीन में खोया है। हम त्योहार मना कम रहे हैं, "पोस्ट" ज़्यादा कर रहे हैं।
तकनीक बुरी नहीं, उसका समय गलत है
विदेश में बैठे बेटे से वीडियो कॉल पर आरती करवाना तकनीक का सबसे सुंदर रूप है। समस्या तब है जब पास बैठे लोगों से ज़्यादा ध्यान हम दूर की नोटिफ़िकेशन को देते हैं। इस दीपावली कुछ छोटे बदलाव आज़माइए:
इस दीपावली आज़माएँ ये 5 आसान बदलाव
- पूजा और भोजन के समय फ़ोन से छुट्टी — घर के सभी लोग अपने फ़ोन एक टोकरी में रख दें। एक घंटा बिना स्क्रीन, सिर्फ़ परिवार।
- एक फ़ोटो, फिर फ़ोन जेब में — यादें सँजोना ज़रूरी है, पर पूरी शाम कैमरे के पीछे बिताना नहीं।
- फॉरवर्ड नहीं, फ़ोन कॉल या मुलाक़ात — सौ लोगों को एक जैसा मैसेज भेजने के बजाय पाँच अपनों को फ़ोन करें या उनके घर जाएँ।
- बच्चों को स्क्रीन नहीं, रंगोली दें — उनके साथ मांडने बनाइए, दीये रँगिए, मिठाई बनाइए। यही यादें वे बड़े होकर दोहराएँगे।
- बुज़ुर्गों के पास बैठिए — उनसे पुरानी दीपावली के किस्से सुनिए। यह कहानियाँ किसी वेबसाइट पर नहीं मिलतीं।
दीपावली ऑफ़र लिंक से सावधान
त्योहार के मौसम में "दीपावली ऑफ़र", "फ़्री गिफ़्ट" और "लकी ड्रॉ" वाले लिंक तेज़ी से फैलते हैं। इनमें से कई ऑनलाइन ठगी के जाल होते हैं। किसी अनजान लिंक पर क्लिक न करें, ओटीपी किसी के साथ साझा न करें और घर के बुज़ुर्गों को भी यह बात समझाएँ। स्क्रीन से थोड़ी दूरी आपकी जेब को भी सुरक्षित रखेगी।
उदयपुर की दीपावली, उदयपुर के अंदाज़ में
झीलों की नगरी में दीपावली की रौनक अलग ही होती है। रोशनी से जगमगाते बाज़ार, पिछोला और फतहसागर के किनारे टिमटिमाते दीये — इन्हें अपनी आँखों से देखिए, सिर्फ़ मोबाइल के लेंस से नहीं। अपने मोहल्ले के कुम्हार से दीये खरीदिए, स्थानीय दुकानदार से मिठाई लीजिए। असली "लोकल" वही है।
दीपावली अंधकार पर प्रकाश की जीत का पर्व है। इस बार वह प्रकाश स्क्रीन की नीली रोशनी नहीं, अपनों के चेहरों की मुस्कान हो। फ़ोन साल भर साथ रहेगा, पर ये पाँच दिन और ये पल दोबारा नहीं आएँगे।
आप सभी को 3i Planet परिवार की ओर से दीपावली की हार्दिक शुभकामनाएँ।
(लेखक उदयपुर स्थित वेब डिज़ाइन एवं डिजिटल मार्केटिंग एजेंसी 3i Planet के संस्थापक हैं और पिछले 11 वर्षों से डिजिटल क्षेत्र में कार्यरत हैं।)


